Monday, February 27, 2017

स्वतंत्र मधेश देश ही क्यों चाहिए, दूसरा समाधान क्यों नहीं ?

  •  फिरंगी नेपाली सेना और पुलिस को मधेश से वापस करने के लिए, और उसकी जगह पर मधेशी सेना और पुलिस बनाने के लिए। यह तभी ही हो सकता है जब मधेश आजाद होगा, अन्यथा नहीं। और जब तक मधेश की अपनी सेना नहीं होती है, तब तक कोई संविधान, कोई नियम-कानून, कोई शासन-व्यवस्था, कुछ भी मायना नहीं रखता; चाहे संविधान में जितना भी अधिकार लिखवा लें, कोई अर्थ नहीं रखता। फिरंगी नेपाली सेना को लगाकर पाया हुआ सारे अधिकार को पल भर में नेपाली शासक छीन सकते हैं। अभी मधेश में ९५% से ज्यादा सेना मधेश के बाहर से आकर कब्जा जमाकर बैठी हुई है, पूरी की पूरी नेपाली सशस्त्र पुलिस हमारे घर-दरवाजे पर बन्दुक लेकर खडी हैं। मधेश को मुक्त करने के लिए उन फिरंगी नेपाली सेना और पुलिस को वापस करना ही होगा, और मधेशी सेना और पुलिस बनानी ही पडेगी। इससे लाखों मधेशियों को नौकरी भी मिलेगी।
  • पहाडियों द्वारा हो रहे मधेश का कब्जा रोकने के लिए। मधेश के अस्तित्व के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है फिरंगी नेपालियों का मधेश में आकर कब्जा जमाना, मधेश की जमीन हडपकर यहाँ पर बस जाना। इस तरह से नेपाली लोग पूरे मधेश पर कब्जा जमाना चाहते हैं; झापा, चितवन और कंचनपुर जैसे जिलों में तो पहाडी लोग पूरी तरह कब्जा जमा ही चुके हैं और वहाँ पर मधेशियों की हालत क्या है, आप देख सकते हैं। आज से ६० वर्ष पहले मधेश में केवल ६% पहाडी लोग थे, पर आज ३६% हो गए। अगर इसे अब भी नहीं रोका गया, तो पूरे मधेश पर पहाडी लोग कब्जा जमा डालेंगे, और मधेशियों को मधेश से ही भागना पडेगा, शरणार्थी होना पडेगा। और पहाडियों के इस आप्रवासन को तभी ही रोका जा सकता है, जब मधेश आजाद होगा, अन्यथा नहीं।
  • मधेश की नौकरी मधेशबासियों को ही देने के लिए: नेपाली साम्राज्य में मधेशियों को नौकरी मिलना नामुमकिन सा हो गया है। नेपाली शासक मधेशियों को कोई नौकरी नहीं देना चाहते हैं, मधेश में भी पहाडी ही कर्मचारी, सिडिओ, एसपी को रखते हैं। तो मधेश की नौकरी मधेशबासियों को ही देने के लिए मधेश को आजाद करना ही होगा, अन्यथा मधेश के बाहर से लाकर पहाडियों को ही नौकरी दिया जाता रहेगा, और बेचारे मधेशी लोग बेरोजगार दरदर भटकते रहेंगे। खाली मधेश प्रदेश बन जाने से यह सम्भव नहीं होगा, उसमें तो ओखलढुंगा या डोल्पा से आकर पहाडी लोग ही मधेश के मुख्यमंत्री भी बन सकेंगे; सिडिओ, एसपी, कर्मचारी भी पहाड से ही आकर बनेंगे।
  • नागरिकता, सुरक्षा और विदेश नीति अपने हाथों में लेने के लिए: मधेशियों के लिए नागरिकता, सुरक्षा और विदेश नीति बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है और उसको पूर्णत: अपने हाथों में लेने के लिए मधेश को आजाद करना ही होगा। अन्यथा नागरिकता देने या खारिज करने का अधिकार, विदेश या सुरक्षा नीति बनाने का अधिकार सदैव नेपाली शासकों के हाथों में ही रहेगा, और नेपाली शासक मधेशियों को नागरिकता विहीन करके, मधेश में सेना और सशस्त्र पुलिस लगाकर दमन करके, सीमाक्षेत्र में अपनी मनमानी से नीति लगाके मधेशियों को अनागरिक, राज्यविहीन और शरणार्थी बनाते रहेंगे।
  • अपना साधन-स्रोत, खानी, राजस्व, पैसा, वैदेशिक अनुदान, लगानी आदि पर पूर्ण अधिकार कायम करने के लिए और अपने विकास में लगाने के लिए: मधेश के साधन-स्रोत, खानी, राजस्व, पैसा, वैदेशिक अनुदान, लगानी आदि पर पूर्ण अधिकार कायम करने के लिए और अपने विकास में लगाने के लिए मधेश को आजाद करना ही होगा, तभी ही उन चीजों पर मधेशियों का पूर्ण नियन्त्रण हो सकता है। अन्यथा उन चीजों पर नेपाली शासक अपना आधिपत्य जमाए रखेगा, और सारे साधन-स्रोत, राजस्व, वैदेशिक अनुदान, पैसा पहाड की ओर ले जाता रहेगा, पहाड के लिए खर्च करता रहेगा।
  • स्थायी रूप से अधिकार पाने के लिए: चाहे कोई भी अधिकार हो, स्थायी रुप से पाने के लिए मधेश को आजाद करना ही होगा। अन्यथा जो अधिकार पहले मिल भी चुका रहता है, वह भी नेपाली शासक मौका मिलते ही छीन लेता है। यहाँ तक की वितरण की हुई नागरिकता को भी हजारों की संख्या में खारेज कर देता है, तो दूसरी चीजों की बात ही क्या! संविधान या सम्झौता में मधेशियों का अधिकार स्पष्ट लिखे रहने के बाबजूद भी मौका मिलते ही नेपाली शासक उसको उलटा देता है। इसलिए स्थायी समाधान की ओर जाना ही होगा, भूलभूलैया में अब नहीं रह सकते। अगर हमारे हाथ नेपाली फिरंगियों ने बाँध दिया है, तो हमें इनसे बार-बार भीख मांगने की बजाय, कुछ खाने के लिए दे दो कहके बार-बार इनके पैर पकडकर गिडगिडाने की वजाय, अपना हाथ हमें खोलना होगा। वही स्थायी समाधान है, उनसे भीख मांग-मांग कर, उनकी कृपा पर हम कब तक जी सकते हैं ?
  • गुलामी से मुक्ति और आत्मसम्मान के लिए: आखिर कब तक हम गुलाम की तरह नेपाली राज में जीते रहेंगे, कब तक दूसरे-तीसरे दर्जे के नागरिक बने रहेंगे ? उससे मुक्ति पाने के लिए मधेश को आजाद करना ही होगा, अपने आत्मसम्मान के लिए भी मधेश को आजाद करना ही होगा। गुलामी की जंजीर को तोडना ही होगा।

ऊपर की ये बातें खाली मधेश प्रदेश बन जाने से समाधान कदापि नहीं हो सकेगा, स्वतन्त्र मधेश अलग देश बनने से ही हो सकेगा, इसलिए मधेशियों को ‘आजाद मधेश’ के लिए ही लडना होगा।

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