Wednesday, July 18, 2018

प्रदेश नं २ सरकार द्वारा मधेशियों के साथ घोर षड्यन्त्र : डा. सी के राउत


प्रदेश नं २ सरकार द्वारा मधेशियों के साथ घोर षड्यन्त्र : ७२.५% से ज्यादा नौकरियों में एकल जाति/पहाडियों की कब्जा जमाने का षड्यन्त्र।
प्रदेश नं २ सरकार द्वारा अंधेरे रस्ते से, चोरी-चोरी, दर्जनों विधेयक और ऐन लाया जा रहा है, प्रमाणीकरण किया जा रहा है। जहाँ उसमें समानुपातिक समावेशी का सिद्धान्त लगाकर मधेशियों को न्याय देना था, वहीं उसमें षड्यन्त्रकारियों द्वारा इस तरह से प्रावधान लाया जा रहा है, ताकि पूरे ७२.५% नौकरी और पदों पर किसी एकल जाति / पहाडियों की कब्जा हो जाये। उससे ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि दूसरे कोटा में भी वही दाबे करेंगे। ऐसे प्रावधान से सिद्धान्तत: पूरे सीटों के 72.5% + 6.8% + 2.3% करके ८०% से ज्यादा पर पहाडियों का कब्जा भी हो सकता है ! और मधेस में ही मधेशियों को २०% सीट भी पाना मुश्किल होगा !
इसके अलावा ऐसे-ऐसे षड्यन्त्र किया गया है कि आरक्षणवाला सीट में मधेशियों को हटाने की पूरी कोशिस की जायेगी, आन्तरिक खुला परीक्षा के नाम पर।

अगर ऐसी आरक्षण की व्यवस्था लगाना है, तो मधेशियों को पूर्ण समानुपातिक की व्यवस्था लागू करना सम्भवत: बेहतर होगा; पूरे १००% में सर्वप्रथम क्लस्टर करके, उसमें महिला, फिर उस क्लस्टर के भीतर में खुला और आरक्षित किया जाना सम्भवत: बेहतर और सुरक्षित रहेगा। अभी जो आरक्षण दिया गया है, वह ४५% को १००% मानकर, उसमें भी महिला को ५०% हटाकर अलग कर दिया गया है। अर्थात् सिर्फ २२.५% के भीतर ६ क्लस्टर करके आरक्षण दिया है, जिसमें आदिवासी जनजातिको १५%, मधेसी (कौन-कौन?) को १३%, दलितको ७%, मुस्लिमको ५%, थारुको ५% और खस आर्यको ५% दिया गया है। परन्तु इसका इफेक्टिव आरक्षण प्रतिशत बहुत कम होगा क्योंकि आरक्षण से मिले सीटों को सौ प्रतिशत अर्थात् पूरे सीट के मापदंड पर देखना होगा।
अत: अन्तत: इफेक्टिव आरक्षण मधेशी के लिए सिर्फ ५.९%, दलित के लिए ३.२% (जनसंख्या १८.३%), मुस्लिम के लिए २.३% (जनसंख्या ११.६%) और थारु के लिए २.३% (जनसंख्या ५.३%) ही होगा। दुसरे समुदाय जैसे यादव, कुर्मी, कोइरी आदि के १ भी लोग जा पायेंगे की नहीं, इसकी कोई गैरन्टी इस प्रावधान में नहीं है, सिद्धान्तत: १ भी नहीं जा सकते हैं।
(नोट: जिन लोगों को यह व्यवस्था पसंद नहीं, वे संघीय/प्रदेश सरकार से कहें, यह व्यवस्था कोई हमने नहीं लाई है !)
बड़ी आश्चर्य की बात है इतना बड़ा-बड़ा षडयन्त्र मधेशियों के साथ किया जा रहा है, और सचेत कराने तक के लिए भी कोई आगे नहीं आ रहे हैं। हम भी चूप ही थे परंतु इससे पहले की बात बहुत बिगड़ जाये, सचेत कराना दायित्व है। मधेशी जनता खुद इन आँकडों को खुद देखें और सचेत हों। क्योंकि एक बार विभेद ऐन और कानून में संस्थागत हो गया, एक बार कर्मचारी और पुलिस की भर्त्ती हो गई, तो फिर बदलना बहुत ही मुश्किल होगा।
मधेशियों के साथ षडयन्त्र बंद हो
मधेश देश स्वतन्त्र हो
###
आरक्षणवारे किन छ राजपा र फोरमको दोहोरो नीति ?
http://ratopati.com/story/51151
प्रदेश प्रहरी सेवालाई समावेशी बनाउन खुल्ला प्रतियोगितात्मक परीक्षाद्वारा पूर्ति हुने पदमध्ये ४५ प्रतिशत पद छुट्याई सो प्रतिशितलाई शत प्रतिशत मानी सात क्लस्टरमा आरक्षणको व्यवस्था गरेको छ । ५५ प्रतिशतलाई खुल्ला प्रतिस्पर्धाद्वारा चयन गर्नेछ भने ४५ प्रतिशत आरक्षण प्राणालीबाट चयन गर्ने जनाइएको छ । जसमा महिलालाई ५० प्रतिशत, आदिवासी जनजाति १५ प्रतिशत, मधेसीलाई १३ प्रतिशत, दलितलाई ७ प्रतिशत, मुस्लिमलाई ५ प्रतिशत, थारुलाई ५ प्रतिशत र आर्थिक रूपले विपन्न खस आर्यलाई पाँच प्रतिशत आरक्षण दिएको छ ।
प्रदेश २ मा मधेसी दलितको सङ्ख्या १८.३ प्रतिशत, यादवको सङ्ख्या १४.१५ प्रतिशत, मुसलमानको सङ्ख्या ११.६ प्रतिशत, पहाडीको सङ्ख्या १२.६ प्रतिशत, मधेसी आदिवासीको सङ्ख्या ८.४ प्रतिशत, कोइरीको सङ्ख्या ४.१ प्रतिशत, कुर्मीको सङ्ख्या ३ प्रतिशत, मधेसी उच्च जातिको सङ्ख्या २.९६ प्रतिशत र अन्यको सङ्ख्या १९ प्रतिशत रहेका छन् ।

Wednesday, November 15, 2017

बदर भाेट ही मधेश के लिये सदर है :अब्दुल खानं



बदर भाेट ही मधेश के लिऐ सदर है
 
अब्दुल खानं,प्रवक्ता स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन (AIM) अाज कल वर्षाती मधेश भक्त नेता गण अाैर नर्भच्छी अादम खाेर लाेग अनेकन चिन्ह अाैर कलर दार पाेष्टर लेकर जन जन काे गुमराह कर कह रहे है।
चच्चा,दादा,काका,मामा,चाची काकी भाेट काे खराब मत कर्ना वर्ना उसका मतलब ही नही रहेगा,यिन भाेट बदर अभियानियाें के बात मे मत अाना मेरे ही निशान मे छाप लगाना,यिस वार हमारी वारि अभितक सब काे देखा अब हम काे देखाे। यही लाेग हैं जाे कल तक अाप काे अान्दाेलन के लिऐ ट्याक्टर,बस मे जबरन ले जाते थे कहते थे अाज नही जाएगें ताे अाप के बच्चाे का किया हाेगा,नेपाली लाेग काला संविधान बनाडाला है।
उसे खारिज करना है,पुनर्लेखन करवाना है,मधेश काे खंडित हाेने से बचाना है। यहि लाेग हैं जाे जबरन अाप काे नाका पे ले जाते थे,यही ब्रहम फांस है नेपालियाे काे झुकाने का अाैर रात मे तेल का तसकरी करवाते थे।यही लाेग है जाे उत्तेजित भाषण देकर गरिबाे के बच्चाे काे राेड पे लाकर गाेलियाे से भुनवाते थे।यहि लाेग है जाे काठमाडाैं जाकर वार्ता के नाम पर पैसाेका समझाैता करते थे, अाज वही लाेग सारी वात काे छाेड कर पांच साल के लिऐ ऐक मुष्ट धाेखा देने के लिऐ अाप के मत काे बेचने का दुरुपयाेग हेतु अपने मत काे सदर मानते हैं।हकिक तन किसि ऐक काे भाेट देना सम्रग मधेश के लिऐ बदर हाेगा अाैर ऐक के लिऐ बदर करना पुरे मधेश के लिऐ सदर हाेगा,उसि से यिन धाेखे वाजाे का पर्दा फास हाेगा,साेंचना अाप काे है।


Sunday, October 8, 2017

मधेश और मधेशी उपर किए गए नेपाली षड़यन्त्र और चरम विभेद का वास्तविक तथ्य



सन् ८ दिसेम्बर १८१६ के बाद से मधेश और मधेशी उपर किए गए नेपाली षड़यन्त्र और चरम विभेद का वास्तविक तथ्य...
षड़यन्त्र नं. १ :
वि.सं. २०१४, चितवन, में "राप्ती भ्याली विकास योजना(Rv-Dv)"
नतिजा :
२०२७ साल में ३७,००० धर्तीपुत्र थारू मधेशियों को चितवन से भगाकर वहाँ दशगुणा पहाडी/नेपाली पहाड से लाकर बसाया गया |
आज चितवन पूर्णत: नेपालियों के कब्जा में है और थारू लाचार पड़ा है |
षड़यन्त्र नं. २ :
वि.सं. २०२०, "नेपाल पुनर्वास कम्पनी" का स्थापना हुआ
नतिजा :
* नेपाली सरकारद्वारा पहाड़ से नेपालियों को लाकर मुफ्त में अनाज, राज्य से धनकोष और सार्वजनिक जमीन देकर बसाया गया,
* नई बस्तियों में उनके लिए स्कुल और अस्पताल बनवाया गया ।
* जिनको जमीन उपलब्ध नहीं हो सका, उनके लिए नेपाली सरकार जंगल विनास कर १,१६,५५० बिघा मधेशी जमीन उन्हें दे दिया गया।
षड़यन्त्र नं. - ३
जमीन कब्जा पर सरकारी छुट :
नतिजा :
अनधिकृत् रूप में ३,५४,४०० विघा जमीन जंगल फडानी कर पहाडी लोग वैसे ही आकर बस गए, मधेशी लाचार होकर देखता ही रह गया |
षड़यन्त्र नं. - ४
पुनरवास कम्पनी खोलना और मधेशी जमीन कब्जा करना,
असर :
नेपालियोंद्वारा मधेश कब्जा करने के लिए मधेश भर ६ पुनर्वास कम्पनियाँ षड्यन्त्र पूर्वक खोला गया :
१. झापा पुनर्वास कम्पनी
२. सर्लाहि पुनर्वास कम्पनी
३. नवलपरासी पुनर्वास कम्पनी
४. ताराताल पु.क.
५. कैलाली " "
६. कंचनपूर पुनर्वास कम्पनी |
षड़यन्त्र नं. - ५
वन शुद्धिकरण का नाटक :
नतिजा :
"वन शुद्धिकरण" के नाम पर सन् १९९०(वि.सं. ०४७) तक लाखौं पहाडी/नेपालियों को जमीन दे दिया गया |
नेपाली लोग बिना नियम के जंगल कटानी कर उसे बेनामी बताकर कब्जा कर लेते थे और अपना नाम करबा लेते थे। जिसका शिकार पूरव के राजवंशी लोग हुवे ।
षड़यन्त्र नं. - ६
हुलाकी राजमार्ग का बिकल्प महेन्द्र पथका निर्माण,
असर :
हुलाकी मार्ग आसपास मधेशियों का जमीन पहले से था, जहाँ नेपालियों को लाना और बसाना संभव नहीं था | इस तथ्यको देखकर सरकार नें षड़यन्त्र पूर्वक पूर्व-पश्चिम राजमार्ग जंगल के बीचोबीच बनाया ताकि उसके आसपास नेपालियों का बसोबास हो और शहर बसे |
नीजगढ़, बर्दीबास, लालगढ़, पथलैया,
नारायणघाट, ईटहरी, बिर्तामोड़, उर्लाबारी, काकरभिट्टा, बुटवल, कोहलपुर, अतरिया आादि वही नवीन शहर है।
जो राजमार्ग राणा कालमें बना था वह आज भी वैसे ही है लेकिन पहाडी लोक-मार्ग आज पहाड के बिचोविच दौड़ रहा है |
कोशी सम्झौता, काली सम्झौता, गण्डक, कर्णीली जैसे नदियों के सम्झौते से आज मधेशी भूमि पानी विहीन बाँझ पड़ा है | हर अन्तराष्ट्रिय सन्धी सम्झौते से ९०% लाभ नेपालियों को ही मिलता है, बाँकी १०% दिखाने और मधेशी नेताओं को फुसलाने हेतु मधेश को भी देता है | इस तरह हम मधेशी धीरेधीरे कंगाल होते जा रहे हैं | बेघर भुमिहीन बनते जा रहे हैं | श्रोत साधन समाप्त होता जा रहा है | हम लुटते जा रहे हैं | बरवाद होते जा रहे हैं |
बस, स्वतन्त्र मधेश ही है एक विकल्प...

सप्तरी क्षेत्र ३ बाट संघीय सांसद पदमा सुरेन्द्र मधेसीको उम्मेदवारी घोषणा

सप्तरी , ०३ कार्तिक  । सप्तरी  जिल्लाको निर्वाचन क्षेत्र नं. ३ बाट सुरेन्द्र मधेसीले आगामी प्रतिनिधि सभा निर्वाचनमा आफ्नो उम्मेदवारी घोषणा ग...